ट्रंप के झटके से गिरी बाजार की दीवार, राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर साधा निशाना

नई दिल्ली: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ वॉर (शुल्क युद्ध) के असर से सोमवार को भारतीय शेयर बाजार बुरी तरह धराशायी हो गया। सेंसेक्स 2,226.79 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ। इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि “ट्रंप ने उस भ्रम का पर्दाफाश कर दिया है”, जिसमें देश अब तक जी रहा था। Trump Tariff Impact on Indian Market

राहुल गांधी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, “ट्रंप ने उस भ्रम की चादर को उतार दिया है। अब कड़वी सच्चाई सामने है। पीएम मोदी कहीं नजर नहीं आ रहे।” उन्होंने आगे कहा, “भारत को अब हकीकत स्वीकार करनी होगी। हमारे पास कोई विकल्प नहीं बचा है सिवाय इसके कि हम एक मजबूत, उत्पादन आधारित अर्थव्यवस्था बनाएं जो हर भारतीय के लिए काम करे।”

ट्रंप के टैरिफ से टूटा बाजार का भरोसा

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चीन पर भारी शुल्क लगाने के बाद, जो दुनिया की सबसे बड़ी मैन्युफैक्चरिंग अर्थव्यवस्था है, वैश्विक बाजारों में भूचाल आ गया। भारत समेत अन्य देशों पर भी ट्रंप ने जवाबी टैरिफ लगा दिए, जिसका असर सोमवार को साफ दिखाई दिया।

बीएसई सेंसेक्स 2,226.79 अंक या 2.95% की गिरावट के साथ 73,137.90 पर बंद हुआ। दिन के दौरान सेंसेक्स 3,939.68 अंक तक लुढ़क गया था। एनएसई निफ्टी ने भी 742.85 अंक या 3.24% की गिरावट के साथ 22,161.60 पर कारोबार समाप्त किया। वहीं, कारोबार के दौरान यह सूचकांक 1,160.8 अंक तक गिरा था।

एशियाई बाजारों में भी मंदी छाई रही। हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक 13% से अधिक गिरा, टोक्यो का निक्केई 225 करीब 8% नीचे आया, शंघाई एसएसई कंपोजिट इंडेक्स में 7% से अधिक की गिरावट दर्ज हुई, जबकि साउथ कोरिया का कोस्पी सूचकांक 5% तक फिसला। यूरोपीय बाजारों में भी भारी बिकवाली देखी गई, और वे करीब 6% तक गिरावट में रहे।

राहुल गांधी ने पटना में एक जनसभा को संबोधित करते हुए भी कहा, “अमेरिका के राष्ट्रपति ने स्टॉक मार्केट में गिरावट ला दी है। हमारे देश में 1% से भी कम लोग शेयर बाजार में निवेश करते हैं। यानी यह क्षेत्र आम आदमी के लिए नहीं है। इसमें अनगिनत पैसा कमाया जाता है, लेकिन इसका लाभ जनता तक नहीं पहुंचता।”

राहुल गांधी का यह बयान न केवल सरकार पर सीधा हमला है, बल्कि भारत की आर्थिक नीतियों पर भी एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। उनके अनुसार, भारत को आत्मनिर्भर और उत्पादन पर केंद्रित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ना ही होगा, ताकि ऐसी वैश्विक उठापटक से देश की अर्थव्यवस्था कम प्रभावित हो।

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